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आरती साठे की हाईकोर्ट जज के तौर पर नियुक्ति पर सियासत गरमाई, वडेट्टीवार बोले, ‘राजनीतिक नियुक्तियों से न्यायपालिका चरमरा जाएगी’

समीर वानखेडे :
जनता न्यायपालिका की ओर आशा भरी नज़रों से देखती है। हाल के दिनों में न्यायपालिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने मांग की है कि भाजपा की प्रवक्ता रहीं आरती साठे को मुंबई उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त न किया जाए। जिन आरती साठे को मुंबई उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है, उन्होंने 2024 में भाजपा पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले साठे भाजपा प्रवक्ता के रूप में काम कर चुकी हैं। वडेट्टीवार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध है कि इस नियुक्ति को रद्द किया जाए।
पार्टी प्रवक्ता के रूप में काम कर चुके व्यक्ति के न्यायाधीश के रूप में चयन से यह चर्चा छिड़ गई है कि विशिष्ट विचारों वाले व्यक्ति का चयन किया गया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या न्यायपालिका स्वतंत्र रह गई है। राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बयान और टिप्पणियाँ न्यायपालिका पर सवाल खड़े करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राहुल गांधी के बारे में ‘असली भारतीय कौन है’ जैसी टिप्पणियाँ कर रहे हैं, जिससे न्यायपालिका पर से भरोसा उठ रहा है। राजनीतिक नियुक्तियों से न्यायपालिका चरमरा जाएगी। मैं सुप्रीम कोर्ट से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि राजनीतिक व्यक्तियों को न्यायाधीश के पद पर नियुक्त न किया जाए। यह नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए, वडेट्टीवार ने कहा।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा आरती साठे को बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त किए जाने के बाद, रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई थी। सार्वजनिक मंच पर सत्ताधारी दल की पैरवी करने वाले व्यक्ति की जज के पद पर नियुक्ति लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात है। इसका भारतीय न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। क्या राजनीतिक हस्तियों को सिर्फ़ इसलिए सीधे जज नियुक्त करना कि वे जज बनने की योग्यता रखते हैं, न्यायपालिका को राजनीति के अखाड़े में बदलने जैसा नहीं है? रोहित पवार ने सवाल उठाया।

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